आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अब साइबर अपराधी बहुत कम समय में किसी सॉफ्टवेयर, वेबसाइट या ऐप की कमजोरियां खोज सकते हैं। इससे फर्जी वेबसाइट बनाना, फिशिंग मेसेज तैयार करना, पासवर्ड चुराने की कोशिश करना और ऑनलाइन ठगी को अंजाम देना पहले के मुकाबले काफी आसान और तेज़ हो गया है जिससे आम लोग ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं।