किसी कर्मचारी की नियुक्ति पर कंपनी द्वारा किया जाने वाला सालाना खर्च कॉस्ट टू कंपनी (सीटीसी) कहलाता है जबकि कटौतियों के बाद कर्मचारी को मिलने वाली राशि इन-हैंड सैलरी कहलाती है। इन कटौतियों में ईपीएफ, इनकम टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स और अन्य लाभ होते हैं। इसी कारण से आमतौर पर कर्मचारियों की सीटीसी उनकी इन-हैंड सैलरी से अधिक होती है।