आम के मुरीद थे कई मुगल बादशाह, 'बाबरनामा' में भी किया गया था ज़िक्र
कई मुगल बादशाह आम के मुरीद थे। बाबर ने अपने संस्मरण 'बाबरनामा' में लिखा था, "आम की गंध शुरू में अजीब लगी लेकिन स्वाद में यह बेजोड़ है।" अकबर ने 'आईन-ए-अकबरी' में आम की तारीफ की और बिहार में 1,00,000 आम के पेड़ लगवाए थे। जहांगीर आम व गुलाब से बनी शराब पीता था। औरंगज़ेब भी आम का शौकीन था।