रिपोर्ट्स के अनुसार, पहली शताब्दी ईस्वी में रोमन सम्राट नीरो और फिर सम्राट वेस्पासियन ने पेशाब के संग्रह पर टैक्स लगाया था जिससे ही प्रसिद्ध मुहावरे 'पैसे में बदबू नहीं होती' की उत्पत्ति हुई। बकौल रिपोर्ट्स, उस समय लोग पेशाब को मूल्यवान मानते थे व कपड़े धोने, ब्लीचिंग, लेदर टैनिंग और दांत साफ करने में इसका इस्तेमाल होता था।