इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने मामले में ₹2 का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1985 के अदालती फैसले को लगभग 10,274 दिनों की देरी से 2022 में चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं पर ₹2 का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता 1984 के लोन डिफॉल्टर के वारिस हैं और उन्होंने दावा किया कि उन्हें नीलामी की जानकारी नहीं थी जिसके कारण उनकी कृषि भूमि चली गई लेकिन अदालती रिकॉर्ड उनकी सक्रिय भागीदारी दर्शाते हैं।

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