कुंभ में नागा साधु-संतों के स्नान को 'शाही स्नान' का नाम कब मिला?

इतिहासकार हेरंब चतुर्वेदी ने बताया है कि मराठा पेशवा ने 'शाही स्नान' और 'पेशवाई' की व्यवस्था दी थी। 1761 में हरिद्वार कुंभ में अखाड़ों में पहले स्नान को लेकर हुए खून-खराबे के बाद उसे रोकने के लिए चित्रकूट के बाबा रामचंद्र दास की अर्ज़ी पर पेशवा अदालत ने फैसला देते हुए 1801 में महास्नान को 'शाही स्नान' नाम दिया।

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