मान्यताओं के मुताबिक, नागा साधु 'प्राकृतिक अवस्था' को महत्व देते हैं। इंसान निर्वस्त्र जन्म लेता है और यही 'प्राकृतिक अवस्था' है इसलिए वे वस्त्र नहीं पहनते। नागा साधु बनने में 12 वर्ष लगते हैं जिनमें से 6 वर्ष वे लंगोट के अलावा कुछ नहीं पहनते और कुंभ मेले में प्रण लेने के बाद लंगोट का भी त्याग कर देते हैं।