किताबों में इस्तेमाल होने वाले कागज़ और सियाही के कारण उनसे महक आती है। 'टाइम्स नाउ नवभारत' के अनुसार, किताबों के कागज़ बनाने में सेल्योलोज़ और लिगनिन केमिकल का इस्तेमाल होता है जो एरोमैटिक केमिकल होते हैं। बकौल रिपोर्ट, ऑक्सीजन के साथ रिऐक्ट करने पर पेपर में मौजूद केमिकल का ब्रेकडाउन होता है जिससे महक आनी शुरू हो जाती है।