किन टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स ऑडिट करवाना ज़रूरी है?

इनकम टैक्स ऐक्ट 1961 की धारा 44AB के तहत ₹1 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर वाले बिज़नेस के लिए टैक्स ऑडिट करवाना ज़रूरी है। अगर 95% ट्रांज़ैक्शन डिजिटल हैं तो सीमा बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी जाती है। फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील या आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स की सालाना आय ₹50 लाख से अधिक होने पर उन्हें भी ऑडिट करवाना ज़रूरी है।

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