नेपाल को 'सती ले सरापेको देश' कहा जाता है और इसकी कहानी 17वीं शताब्दी के मल्ल वंश से जुड़ी है। महाराज लक्ष्मी नरसिंह मल्ला के दरबार में कार्यरत काजी भीम मल्ल की लोकप्रियता-साख से चिढ़कर उनके खिलाफ साज़िश की गई और उन्हें मृत्युदंड दिया गया। इसके बाद भुवनलक्ष्मी ने भीम की चिता पर सती होने से पहले यह श्राप दिया।