भारत में पहला रेल बजट 1924 में पेश किया गया था जिसका विलय 2017 में आम बजट में कर दिया गया था। नीति आयोग के अनुसार, गैरज़रूरी असुविधा से बचाव, वित्तीय हालात में सुधार के लक्ष्य, लंबे समय की प्लानिंग, पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ाने और अन्य क्षेत्रों से बेहतर तालमेल के मद्देनज़र रेल बजट को खत्म किया गया था।