क्यों लिखने के लिए आमतौर पर नीले या काले रंग की स्याही का होता है इस्तेमाल?

काली स्याही आमतौर पर कार्बन आधारित होती है और समय के साथ इसका रंग न बदलने के चलते इससे लिखे गए शब्द लंबे समय तक स्पष्ट रहते हैं। वहीं, नीली स्याही में विशेष रंगद्रव्य होते हैं और वह भी न तो यूवी किरणों से प्रभावित होती, न ही उसकी लिखाई समय के साथ धुंधली होती है।

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