कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन और इंटरनेट के ज़्यादा इस्तेमाल से दिमाग के काम करने की क्षमता कम होती है जिसे डिजिटल डिमेंशिया कहते है। इसमें याददाश्त कमज़ोर हो जाती है और दिमाग हमेशा उलझन में रहता है। एक जर्नल के मुताबिक, डिवाइसेज़ का इस्तेमाल दिमाग के बाएं हिस्से को सक्रिय रखता है और एकाग्रता से जुड़ा दाहिना हिस्सा निष्क्रिय रहता है।