क्या है एंजेल टैक्स?

जब कोई स्टार्टअप किसी निवेशक से पैसे जुटाता है तो उसे फेयर वैल्यू से जितना अधिक फंड मिलता था और इस पर जितनी टैक्स देनदारी बनती थी, उसे एंजेल टैक्स कहा जाता था। जैसे, किसी स्टार्टअप ने ₹10,000 के भाव पर 1 लाख शेयर जारी किए लेकिन उसकी फेयर मार्केट वैल्यू ₹70-करोड़ है तो उसे ₹30-करोड़ पर टैक्स देना होगा।

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