संथारा जैन धर्म में निभाई जाने वाली एक प्रथा है जिसके तहत इसमें व्यक्ति स्वेच्छा से अन्न-जल का त्याग (व्रत) करके मृत्यु को स्वीकार करता है। यह प्रथा 2015 में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा अवैध करार दी गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगा दी थी जिससे यह कानूनी रूप से वैध बनी रही।