क्या है रूप चतुर्दशी पर किए जाने वाले अभ्यंग स्नान का महत्व?
दिवाली से एक दिन पहले रुप चतुर्दशी या नरक चतुर्दशी के दिन तेल की मालिश कर और उबटन लगाकर नहाने की परंपरा है जिसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। अभ्यंग स्नान के लिए नहाने के पानी में चिड़चिड़ी के पत्ते भी डाले जाते हैं। माना जाता है कि इस स्नान से मानसिक शांति मिलती है और रूप भी निखरता है।