लोगों के लिए हानिकारक माने जाने वाली तंबाकू, शराब और जुए जैसी वस्तुओं व सेवाओं पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को 'पाप कर' कहते हैं। 'पाप कर' का उद्देश्य ऐसे उत्पादों को महंगा बनाकर उनके इस्तेमाल को घटाना या खत्म करना है। बकौल रिपोर्ट्स, सरकार बजट में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कर की दरों को बढ़ा सकती है।