'ब्रिटेनिका' के अनुसार, 1577 में सिखों के चौथे गुरु रामदास ने अमृतसर की नींव रखी थी। उन्हें मुगल बादशाह अकबर ने ज़मीन दी थी जिस पर उन्होंने उस समय मौजूद रहे गांव तुंग में एक पवित्र सरोवर की खुदाई करने का आदेश दिया था जिसे 'अमृत सरस' नाम दिया गया। इसी अमृत सरस से शहर का नाम अमृतसर पड़ा था।