नागा साधु का अंतिम संस्कार सामान्य दाह संस्कार से अलग होता है और इस विधि को 'जल समाधि' या 'भू-समाधि' कहते हैं। नागा साधु के निधन पर उन्हें गंगाजल से स्नान कराया जाता है और आसन की मुद्रा में बैठाकर भू-समाधि दी जाती है। वहीं, इच्छानुसार नागा साधु का शरीर पवित्र नदी में समाधि के लिए समर्पित किया जाता है।