मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे दारा शिकोह को लोग 'पंडित जी' कहते थे क्योंकि उन्होंने हिंदू धर्म के कई ग्रंथों का अध्ययन किया था और उन्हें फारसी भाषा में अनुवाद करवाया था। शिकोह ने कई अन्य धर्म के भी साहित्यों को पढ़ा और समझा था। उन्होंने बनारस के पंडितों और संन्यासियों के सहयोग से सिर-ए-अकबर नामक पुस्तक तैयार की थी।