केंद्र सरकार ने बढ़ती आबादी के बीच 1963 में कंडोम बांटने की योजना बनाई थी। सरकार उस वक्त कंडोम का नाम 'कामदेव' से प्रेरित होकर 'कामराज' रखना चाहती थी लेकिन तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष का नाम के. कामराज होने के चलते इसे छोड़ दिया गया। बाद में आईआईएम के एक छात्र के सुझाव पर इसका नाम 'निरोध' रखा गया।