किन परिस्थितियों में और कैसे किसी नाबालिग आरोपी को वयस्क मानकर चलाया जाता है मुकदमा?
किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार, 16-18 वर्ष के 'जघन्य अपराधों' के आरोपी किशोरों को वयस्क मानकर मुकदमा चलाया जा सकता है। ऐसे मामलों में किशोर न्याय बोर्ड आरोपी की 'मानसिक-शारीरिक क्षमता', 'अपराध के परिणामों को समझने की योग्यता' और 'अपराध करने की परिस्थितियों' के आधार पर आरोपी को वयस्क मानकर मुकदमा चलाया जाए या नहीं यह तय करता है।