बिटकॉइन की ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में हाविंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे नए बिटकॉइन बनाने की दर को कम किया जाता है। दरअसल, 'बिटकॉइन हाविंग' के तहत हर 4 साल में बिटकॉइन माइनर्स के ब्लॉक रिवॉर्ड आधे कर दिए जाते हैं। इस विभाजन के कारण नए बिटकॉइन के रिवॉर्ड्स आधे हो जाते हैं जिससे बिटकॉइन माइनिंग में कम मुनाफा होता है।