'असोसिएटेड प्रेस' के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 7,000 'ज़ॉम्बी' कंपनियां हैं। ऋण का ब्याज न चुका पा रहीं और दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुकीं अत्यधिक कर्ज़ में डूबी कंपनियों को 'ज़ॉम्बी' कंपनियां कहते हैं। लंबे समय तक कम ब्याज पर कर्ज़ लेने और फिर मुद्रास्फीति बढ़ने के चलते ब्याज दरें बढ़ने से 'ज़ॉम्बी' कंपनियों की संख्या बढ़ी है।