जब मैं रामलला की मूर्ति बना रहा था तो एक बंदर रोज़ दरवाज़े पर दस्तक देता था: अरुण योगीराज
मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि जब वह रामलला की मूर्ति बना रहे थे तो एक बंदर रोज़ाना शाम 4-5 बजे उनके दरवाज़े पर दस्तक देता था। योगीराज ने बताया, "वह (बंदर) आता था, देखता था और लौट जाता था।" इससे पहले उन्होंने कहा था, "प्राण प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति का स्वरूप बिल्कुल बदल गया...मूर्ति की आभा ही बदल गई।"