सीए बलवंत जैन के मुताबिक, अगर मृतक ने वैध वसीयत नहीं बनाई है तो उसकी संपत्ति पर्सनल लॉ के अनुसार कानूनी वारिसों में बंटेगी। ऐसे में 1-अप्रैल से मृत्यु की तारीख तक की आय के लिए एक ही ITR भरना होगा। वैध वसीयत होने पर एग्ज़ीक्यूटर ITR भरेगा और संपत्ति का बंटवारा पूरा होने तक हर साल इसे भरना होगा।