पढ़ने की चाह बनी मंजिल, आज 20 लाख किताबों के संरक्षक हैं पद्मश्री 2026 अंकेगौड़ा
पद्म श्री पुरस्कार से नवाज़े गए अंकेगौड़ा एम (77) को किताबों से लगाव इतना अधिक था कि वह कई किलोमीटर सिर्फ पढ़ने के लिए मैसूर जाते थे। अंकेगौड़ा ने उस समय देखा कि कई छात्र इसी समस्या से जूझ रहे थे और उन्होंने फिर एक लाइब्रेरी बनाने की ठान ली। आज उनकी लाइब्रेरी में 20 लाख से अधिक किताबें हैं।