क्रिप्टोकरेंसी डेटा व एनालिसिस कंपनी कॉइनगेको ने बताया है कि बिटकॉइन ने अपनी 'हाविंग' पूरी कर ली है। 'हाविंग' प्रक्रिया से नए बिटकॉइन बनाने की दर को कम किया जाता है और इसके तहत हर 4 साल में बिटकॉइन माइनर्स के रिवॉर्ड्स आधे कर दिए जाते हैं। गौरतलब है कि पहली बार नवंबर 2012 में बिटकॉइन की 'हाविंग' हुई थी।