भारत को 'कृत्रिम सूर्य' बनाने की कोशिश में बड़ी सफलता मिली है। गुजरात स्थित इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च के SST-1 टोकामक पर 82.6 गीगाहर्ट्ज और 400kW क्षमता वाले गाइरोट्रॉन को स्थापित और चालू किया गया है। SST-1 सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन रिएक्टर है जिसे चुंबकीय क्षेत्र से बेहद गर्म प्लाज़्मा को नियंत्रित कर सूरज जैसी प्रक्रिया दोहराने के लिए बनाया गया है।