मुगल बादशाह अकबर ने अपने दरबार में 9 विद्वानों की नियुक्ति की थी जिन्हें अकबर के 'नवरत्न' के नाम से जाना जाता था। इनमें बीरबल, तानसेन, अबुल फज़ल, फैज़ी, राजा मान सिंह, राजा टोडर मल, मुल्ला दो पियाज़ा, फकीर अज़ियाओ-दीन और अब्दुल रहीम खान-ए-खाना शामिल थे। अकबर इन नवरत्नों की सलाह लिए बिना कोई भी फैसला नहीं लेते थे।