मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, SIP में बाज़ार गिरने पर म्यूचुअल फंड की NAV कम हो जाती है और ऐसे में उसी रकम से ज़्यादा यूनिट्स मिलती हैं। इसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं। बाज़ार के संभलने पर कम कीमत पर खरीदी गई यूनिट्स ज़्यादा फायदा देती हैं और कुल रिटर्न को बेहतर बनाती हैं।