महिलाओं को नागा साध्वी बनने के लिए 10-15 वर्ष तक कठोर ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना पड़ता है और गुरु को अपनी योग्यता व ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रमाण देना होता है। नागा साध्वी को जीवित रहते हुए अपना पिंडदान और मुंडन कराना होता है। दीक्षा के बाद उन्हें अखाड़े से मिला पीला या भगवा कपड़ा पहनना होता है।