यहां बाराती खुद लाते हैं अपना खाना, लड़की वालों को भी खिलाता है यह समाज
रांची (झारखंड) के साहित्यकार राबीलाल के मुताबिक, स्थानीय आदिवासी समाज में दहेज प्रथा का नामो-निशान नहीं है और समाज बेटियों को देवी का दर्जा देता है। उन्होंने बताया कि इस समाज की शादियों में अगर वधू पक्ष आर्थिक रूप से कमज़ोर है तो बाराती अपने साथ खाने का इंतज़ाम करके आते हैं और वह लड़की वालों को भी खिलाते हैं।