जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी ऐंड कम्युनिटी हेल्थ में छपी स्टडी के मुताबिक, हवा में मौजूद प्रदूषकों PM2.5 और PM10 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) के संपर्क में आने से आत्महत्या और उसके विचारों का खतरा बढ़ सकता है। बकौल रिसर्चर्स, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) व ओज़ोन जैसे अन्य वायु प्रदूषकों और नोइज़ पॉल्यूशन भी आत्महत्या के बढ़ते जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।