सावन में ही क्यों की जाती है कांवड़ यात्रा? कौन था पहला कांवड़िया?
सावन में कांवड़ यात्रा की परंपरा समुद्र मंथन से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि विष पीने के बाद भगवान शिव की तपन शांत करने के लिए उन्हें गंगाजल अर्पित किया गया था। वहीं, अलग-अलग कथाओं में भगवान परशुराम, श्रवण कुमार और भगवान राम को पहला कांवड़िया बताया गया है जिन्होंने पवित्र जल से महादेव का अभिषेक किया था।