हैदराबाद के निज़ाम मीर महबूब अली खान की रसोई में पकता था 'पत्थर का गोश्त'
1869 से 1911 तक हैदराबाद के निज़ाम रहे मीर महबूब अली खान आसिफ के साथ शिकार पर रसोइयों का एक दल चलता था। एक बार निज़ाम ने गोश्त खाने की इच्छा जताई लेकिन रसोइये ज़रूरी बर्तन भूल गए थे तो उन्होंने ग्रेनाइट के पत्थर पर गोश्त पकाया जो निज़ाम को पसंद आया और इसका नाम 'पत्थर का गोश्त' पड़ गया।