हीरे, पन्ने, जवाहरात...बांके बिहारी जी का बेशकीमती खज़ाना कहां गया?

बांके बिहारी मंदिर का तोषखाने 54 साल बाद खुला तो वहां बेशकीमती खज़ाने की जगह पीतल के बर्तन और सोने-चांदी की छड़ी मिलीं। एक स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, 1970 में चोरियां हुई थीं जिनमें दो गोस्वामियों का हाथ था और खज़ाना तभी खाली हो गया था। वहीं, मंदिर के एक पुजारी ने 1926 और 1936 की चोरियों का हवाला दिया।

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