रिज़र्व बैंक द्वारा रेपो रेट में बदलाव किए जाने से लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
आरबीआई हर चार महीने में कम-से-कम एक बार रेपो रेट पर विचार-विमर्श करता है और उसके बाद रेपो रेट को बढ़ाने, घटाने या अपरिवर्तित रखने की घोषणा करता है। रेपो रेट में बदलाव से बैंक आमतौर पर अपने ग्राहकों से वसूले जाने वाले ब्याज की दर भी बदल देते हैं। इससे घर, कार और अन्य लोन प्रभावित होते हैं।