हीरो बने स्मित मच्छार की क्या थी वह इच्छा जो पूरी होने पर वह पायलट नहीं बनते?
को-पायलट से भिड़कर 174 लोगों की जान बचाने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार ने परिवार के बिजनेस से जुड़ने के इरादे से पहले टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। उन्होंने मुंबई के वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान एक एविएशन सेमिनार में हिस्सा लिया। करीब 19-साल की उम्र में उन्हें उड़ान भरने में दिलचस्पी हुई।