एक दशक में पहली बार अमेरिका ने जापानी येन खरीदा है। दरअसल, अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड का सबसे बड़ा धारक जापान है। येन में गिरावट आने पर जापान इन बॉन्ड्स को बेच सकता है जिससे अमेरिका की उधारी लागत बढ़ सकती है। इसलिए येन को स्थिर कर अमेरिका अपने कर्ज़ और वित्तीय व्यवस्था पर दबाव कम करना चाहता है।