मकर संक्रांति नाम सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के दिन से पड़ा है। इसे हिंदू पंचांग में साल के महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जाता है। यह पर्व मनाने की प्रथा वैदिक काल से चल रही है। पहले इसे भारत में सनातन धर्म से जुड़े लोग मनाने लगे थे, जो सूर्य पूजा और मौसम परिवर्तन का प्रतीक था।