आज़ादी से पहले ट्रेनों में मिलता था हिंदू-मुस्लिम के लिए अलग-अलग पानी
रेलवे के दस्तावेज़ों के मुताबिक, 20वीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में धार्मिक भावनाओं को देखते हुए ट्रेनों में हिंदू और मुस्लिम के लिए अलग-अलग पानी और चाय की व्यवस्था की गई थी। महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' में ऐसी घटना का ज़िक्र किया था। उस समय 'हिंदू पानी' पिलाने वाले शख्स को 'पानी पांडे' कहा जाता था।
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