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क्यों कभी छींक को नहीं रोकना चाहिए?

short by चंद्रमणि झा / on Saturday, 3 January, 2026
छींक को रोकने से शरीर के अंदर लगभग 160 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा फंस जाती है जिससे कान, साइनस, गले और फेफड़ों में दबाव तेज़ी से बढ़ जाता है। इससे कान के पर्दे और गले फट सकते हैं और संक्रमण हो सकता है। गंभीर मामलों में छींक ज़बरदस्ती रोकने से सिर/गर्दन की रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं।
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