क्यों परिजन की मौत के बाद उनका शव खा जाते थे फोर जनजाति के लोग?
पापुआ न्यू गिनी की फोर जनजाति में 1960 के दशक तक रिश्तेदारों की मौत के बाद उनका शव जलाने या दफनाने की जगह शव खाने की परंपरा थी। जनजाति का मानना था कि शव को दफनाने से उसमें कीड़े लग जाते हैं। हालांकि, इंसानी मांस खाने से होने वाली बीमारियों के चलते जनजाति ने इस परंपरा को बंद कर दिया।
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