कांवड़ यात्रा की शुरुआत गंगाजल भरने से होती है। मान्यताओं के अनुसार, कांवड़िए को गंगा स्नान के बाद जल भरना चाहिए। गंगाजल को साफ बोतल/कलश/कांवड़ के साथ लगे पात्र में भरकर अच्छी तरह बंद कर देना चाहिए ताकि यात्रा के दौरान जल गिरे नहीं और उसमें कोई अशुद्धि न मिले। कावड़ को सीधा ज़मीन पर और अकेला छोड़ने से बचें।