क्या होता है दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप?
दुर्लभ बॉम्बे ब्लड ग्रुप (एचएच) की खोज 1952 में हुई थी और इसका नाम बॉम्बे शहर पर रखा गया था। भारत में 10,000 लोगों में से एक में यह ब्लड ग्रुप पाया जाता है। इस ग्रुप के लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं में एच-ऐंटीजेन की कमी होती है और उन्हें केवल बॉम्बे फेनोटाइप वालों का खून चढ़ाया जा सकता है।
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