नोमुरा रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कमज़ोर ऐंटी-रस्ट मानकों के कारण ज़ंग लगने से ऑटो उद्योग को लगभग ₹87,098 करोड़/वर्ष का नुकसान होता है। यह देश के ऑटोमोटिव सेक्टर की कुल GDP का 3% है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारतीय गाड़ियां वैश्विक ज़ंग-रोधी मानकों को अपनाती हैं तो इंडस्ट्री सालाना ₹30,484 करोड़ तक की बचत कर सकती है।