दिल्ली की हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह पर हर साल क्यों मनाया जाता है वसंत पंचमी का पर्व?
एक बार अपने भांजे की मृत्यु से दुखी हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को देखकर उनके शिष्य अमीर खुसरो परेशान हो गए। तब कुछ हिंदुओं को वसंत पंचमी मनाते देख खुसरो ने निज़ामुद्दीन को सरसों के फूल अर्पित किए। इससे खुश होकर निज़ामुद्दीन भी उत्सव में शामिल हुए और तबसे दिल्ली की हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह पर इसे मनाने की परंपरा शुरु हुई।
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