निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कहा है, "मेरी राय में मदरसे होने ही नहीं चाहिए...कई मामलों में मदरसे जिहादी बनाते पाए गए हैं।" उन्होंने कहा, "मदरसों में बच्चों का शोषण हो रहा है, बलात्कार हो रहे हैं...इमामों और मदरसे के शिक्षकों को हिरासत में लिया जा रहा...वे जेल जा रहे लेकिन सिर्फ सज़ा देने से कोई फायदा नहीं होगा।"