शोरगुल वाले माहौल में रहना पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है हार्ट डिज़ीज़ का जोखिम
कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर सीएस अरविंद ने बताया है, "मस्तिष्क शोर को तनाव के रूप में ग्रहण करता है...भले ही आप शोरगुल-भरे वातावरण के आदी हो जाएं लेकिन मस्तिष्क इसे अनदेखा नहीं करता।" उन्होंने कहा, "इससे शरीर का 'फाइट-ऑर-फ्लाइट' रिस्पॉन्स ऐक्टिव होता है जिससे स्ट्रेस हार्मोन्स 'एड्रेनालाईन'-'कोर्टिसोल' निकलते हैं और...लंबे समय तक ऐसा होने से हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है।"
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